Tuesday, May 19, 2015

तुम कहाँ खो गए

दूर तुम आकाश से, देखो मुझे चाहे जभी।
करता हूँ महसूस मेरे पास में तुमको अभी।।
तुम बिना जीवन में कुछ अच्छा नहीं है।
आँख का वो कोर भी सूखा नहीं है।।१।।
साथ खेले थे कभी हम एक ही आँगन तले।
माँ पिता के प्यार से हम साथ ही फूले फले।।
वो तुम्हारा डाँटना भूला नहीं है।
आँख का वो कोर भी सूखा नहीं है।।२।।
वो तुम्हारा झगड़ना और वो उलाहने हैं कहाँ।
तरसता हूँ उन्हीं पल को दिल में लेकर के यहाँ।।
क्यूँ तुम्हारा साथ अब मिलता नहीं है।
आँख का वो कोर भी सूखा नहीं है।।३।।
बालपन की सुलभ यादें, वो तुम्हारा हाथ था।
घर में सब हों रूष्ट फिर भी एक तेरा साथ था।।
दिल में हरदम शून्य सा लगता कहीं है।
आँख का वो कोर भी सूखा नहीं है।।४।।
वो शरारत वो मचलना, साथ तेरे खेलना।
एक पल में खो गया जाने कहाँ वो बचपना।।
आज भी आँगन पड़ा सूना वहीं है।
आँख का वो कोर भी सूखा नहीं है।।५।।
अमित बंसल

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